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Psalms 110

परम्‍वर

ऊद भजन

1 यहरभकहा,

"िओर ,

जब तक ि ैं शत

ों बनूँ।"

2 यहमरजदिबढ़एगा।

अपनशतसन कर

3 िरज

मनआएे;

पविरतयमजवि

गरजनओस समैं।

4 यहशपथ और उसबदल:

"मलिििदक ि अनसदिजक ै।"

5 रभिओर ै;

अपनिवह चल ा।

6 वह ि-ि ों ा,

और ों लगा;

वह समसरधों चल ा।

7 वह िजल एगा;

इसलिवह अपनिकरा।

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