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Psalms 51

प-कषमिथन

िशक िऊद भजन, जब भवियवक्‍ऊद आयोंि वह बतशगया।

1 परम्‍वर, अपनकरअन

पर अनरह कर;

अपनबड़दयअनअपरों िे।

2 अधरि कर,

और कर

3 ैं अपनअपरों नतूँ,

और ितर मनरहतै।

4 ैंििै,

और वह ि्‍ि ें ै;

इसलिजब िणय धरी,

और करसच्‍ठहरे।

5 , ैं अधरउतपन्‍,

और अपनगरें पड़ा।

6 , दय सच्‍रसन्‍ै,

और मन ें ि ें िै।

7 कर,

और ैं पविा;

ो, और ैं िअधि्‍ा।

8 हरऔर आनें ा,

ि हडिाँ ैं मगन ँ।

9 अपनों ओर े,

और अधरों ि

10 परम्‍वर, झमें मन उतपन्‍कर,

और तर िआतनए िउतपन्‍कर

11 अपनउपसिि कर,

और अपनपविआतझसअलग कर

12 अपनउदआने,

और सचआतकर

13 तब ैं अपरिों ों िूँा,

और ओर िेंे।

14 परम्‍वर, उदरकरपरम्‍वर,

हत्‍कर,

तब ैं अपनुँ51:14 अपने मुँह — अक्षरशः अपनी जीभ िकतजय जयककरूँा।

15 रभु, ोंों

ि ुँि करे।

16 बलि रसन्‍नहीं ा,

नहीं ैं चढ़ा;

मबलि रसन्‍नहीं ा।

17 मन परम्‍वर बलिै;

परम्‍वर, और ि

दय नहीं नता।

18 अपनें िभलकर,

और यरशलशहरपनबना।

19 तब िकतबलिों,

अरमबलि तथमबलि आनिा;

और पर चढ़े।

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