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Psalms 96

1 यहिएक नय!

ो,

यहि!

2 यहि,

उसकधनकहो;

िरतििउसकि

उदसमरहो।

3 अनयजिों ें उसकमहिा,

और श-दों ें

उसकआश्‍चरयकरों वरणन करो।

4 ोंि यहमहऔर अति ि ै;

वह सब वतअधिभययै।

5 ोंि श-दसब वतिाँ ैं;

परयहआकशमडल बनै।

6 उसकसमभव और ऐश्‍वरैं;

उसकपविरसें मरऔर ैं।

7 श-दो,

यहसरो;

यहमहिऔर मरो!

8 यहउसकमहिकरो;

ेंकर उसकगनों ें आओ

9 पविरतयमकर यहडवतकरो।

ो,

उसकमनाँपतरहो।

10 ि-ि ों ें कहो,

"यहकरतै।

जगत िै,

वह टलनहीं।

यहश-द

ों खरकरा।"

11 आकआनिो,

और मगन ो!

समऔर उसमें ै,

गरज उठें!

12 और उसमें ै,

रफिों! तब वन जय जयककरेंे।

13 यह यहमनो,

ोंि वह आनै।

वह

करनिआनै;

वह जगत िकते,

और श-दों

सच्‍करा।

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