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Psalms 32

षम्‍ि आन

ऊद मश

1 धनवह िसकअपरषमिगया,

और िसकाँगयो!

2 धनवह मनिसकअधर

यहे,

और िसकआतें कपट ो।

3 जब ैं रहिभर करहते-करहत

हडिाँ िघल गईं।

4 ैं िऔर दबरहा।

बल मकगया। ा।

5 ैंमनअपनि

और अपनअधरिा।

ैंकहा, "ैं अपनअपरयहमनूँा,"

और षमकर िा। ा।

6 इसलिरतभक्‍ऐससमय ें

झसथनकरजब िसकतै;

ि्‍चय जल बड़उस तक पहुँी।

7 िपनै;

कट ें रककरतै।

टकों रहतै। ा।

8 ैं ि ूँऔर िपर चलन

उस पर अगकरूँा;

ैं पर अपन्‍ि रखतसममति ूँा।

9 और खच्‍‍चर समबनिनमें समझ नहीं ी;

उनें लगऔर वश ें िै,

नहीं वश ें नहीं आएे।

10 ्‍पर बहुःआतैं,

परयहपर भररखनउसककररही।

11 धरिो, यहें आनिऔर मगन रहो!

सब मनवो, आनजय जयककरो!

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