1 प्रत्येक जो यह विश्वास करता है कि यीशु ही मसीह है, वह परमेश्वर से उत्पन्न हुआ है और प्रत्येक जो अपने पिता5:1 अक्षरशः उत्पन्न करनेवाले से प्रेम रखता है वह उससे भी प्रेम रखता है जो पिता से उत्पन्न हुआ है। 2 जब हम परमेश्वर से प्रेम रखते और उसकी आज्ञाओं पर चलते हैं, तो इससे हम जानते हैं कि हम परमेश्वर की संतानों से भी प्रेम रखते हैं। 3 क्योंकि परमेश्वर से प्रेम रखना यह है कि हम उसकी आज्ञाओं का पालन करें, और उसकी आज्ञाएँ कठिन नहीं हैं। 4 क्योंकि जो कोई परमेश्वर से उत्पन्न हुआ है वह संसार पर जय पाता है; और वह विजय जिसने संसार पर जय पाई है, हमारा विश्वास है। 5 संसार पर जय पानेवाला कौन है? केवल वह जो यह विश्वास करता है कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्र है।
6 यह वही है जो जल और लहू के द्वारा आया, अर्थात् यीशु मसीह : वह केवल जल के द्वारा नहीं, बल्कि जल और लहू दोनों के द्वारा आया; और जो साक्षी देता है वह आत्मा है, क्योंकि वह आत्मा सत्य है। 7 जो साक्षी देते हैं तीन हैं,5:7 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "और ये तीनों अर्थात् पिता, वचन और पवित्र आत्मा स्वर्ग में साक्षी देते हैं : ये तीन एक हैं।" लिखा है। 8 आत्मा5:8 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "पृथ्वी पर ये तीन हैं जो साक्षी देते हैं :" लिखा है।, जल और लहू; और ये तीनों एकमत हैं। 9 यदि हम मनुष्यों की साक्षी स्वीकार करते हैं, तो परमेश्वर की साक्षी तो उससे कहीं बढ़कर है; क्योंकि परमेश्वर की साक्षी यह है कि उसने अपने पुत्र के विषय में साक्षी दी है। 10 जो परमेश्वर के पुत्र पर विश्वास करता है, वह स्वयं में यह साक्षी रखता है। जो परमेश्वर पर विश्वास नहीं करता उसने उसे झूठा ठहरा दिया है, क्योंकि उसने उस साक्षी पर विश्वास नहीं किया जो परमेश्वर ने अपने पुत्र के विषय में दी है। 11 वह साक्षी यह है : परमेश्वर ने हमें अनंत जीवन दिया है, और यह जीवन उसके पुत्र में है। 12 जिसके पास पुत्र है उसके पास यह जीवन है। जिसके पास परमेश्वर का पुत्र नहीं है उसके पास यह जीवन नहीं। 13 मैंने तुम्हें, जो परमेश्वर के पुत्र के नाम पर विश्वास करते हो, ये बातें इसलिए लिखीं कि तुम जानो कि अनंत जीवन तुम्हारा है5:13 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "और तुम परमेश्वर के पुत्र के नाम पर विश्वास करते रहो" लिखा है।।
14 उसके प्रति हमारा भरोसा यह है कि यदि हम उसकी इच्छा के अनुसार कुछ माँगें, तो वह हमारी सुनता है। 15 यदि हम जानते हैं कि जो कुछ हम माँगते हैं वह हमारी सुनता है, तो हम यह भी जानते हैं कि जो कुछ हमने उससे माँगा है, उसे पाया है।
16 यदि कोई अपने भाई को ऐसा पाप करते देखे, जो मृत्यु की ओर नहीं ले जाता हो, तो वह उसके लिए प्रार्थना करे और परमेश्वर उसे जीवन देगा। यह उनके लिए है जिन्होंने ऐसा पाप किया है जो मृत्यु की ओर नहीं ले जाता। ऐसा भी पाप है जो मृत्यु की ओर ले जाता है; मैं इसके लिए नहीं कहता कि कोई विनती करे। 17 प्रत्येक अधार्मिकता पाप है, परंतु ऐसा पाप भी है जो मृत्यु की ओर नहीं ले जाता।
18 हम जानते हैं कि जो कोई परमेश्वर से उत्पन्न हुआ है, वह पाप में नहीं चलता,5:18 अक्षरशः वह पाप नहीं करता बल्कि वह जो परमेश्वर से उत्पन्न हुआ है,5:18 अर्थात् यीशु उसे बचाए रखता है, और दुष्ट उसे छू नहीं पाता। 19 हम जानते हैं कि हम परमेश्वर के हैं और संपूर्ण संसार उस दुष्ट के वश में पड़ा है। 20 हम जानते हैं कि परमेश्वर का पुत्र आया, और उसने हमें समझ दी है कि हम उस सत्य को जानें; और हम सत्य में हैं, अर्थात् उसके पुत्र यीशु मसीह में। वही सच्चा परमेश्वर और अनंत जीवन है। 21 बच्चो, अपने आपको मूर्तियों से बचाए रखो।