20 फिर परमेश्वर ने कहा, "जल बहुत से जीवित प्राणियों से भर जाए, और पक्षी पृथ्वी के ऊपर आकाश के अंतर में उड़ें।" 21 इस प्रकार परमेश्वर ने विभिन्न प्रजातियों के बड़े-बड़े जलचरों और जल में चलनेवाले सब जीवित प्राणियों की सृष्टि की, और उनसे जल भर गया। इसी प्रकार उसने विभिन्न प्रजातियों के उड़नेवाले पक्षियों की भी सृष्टि की; और परमेश्वर ने देखा कि यह अच्छा है। 22 तब परमेश्वर ने उन्हें यह कहकर आशिष दी, "फूलो-फलो और समुद्र के जल में भर जाओ, और पक्षी पृथ्वी पर बढ़ जाएँ।" 23 तब साँझ हुई और फिर भोर हुआ। यह पाँचवाँ दिन था।
24 फिर परमेश्वर ने कहा, "पृथ्वी से हर एक प्रजाति के जीवित प्राणी, अर्थात् घरेलू पशु, रेंगनेवाले जंतु, और पृथ्वी के वनपशु उनकी अपनी-अपनी प्रजाति के अनुसार उत्पन्न हों।" और ऐसा ही हो गया।