4 तब उसकी कृपादृष्टि उस पर हुई, और उसने उसे अपना सेवक बनाया। फिर उसने उसे अपने घर का अधिकारी ठहराकर अपना सब कुछ उसके हाथ में सौंप दिया। 6 इसलिए उसने अपना सब कुछ यूसुफ के हाथ में छोड़ दिया। जो भोजन वह खाता था उसके अतिरिक्त उसे अपनी किसी भी वस्तु की परवाह नहीं थी।
यूसुफ सुडौल और देखने में सुंदर था।
9 इस घर में मुझसे बड़ा कोई नहीं, और उसने तुझे छोड़ मुझसे कुछ नहीं रख छोड़ा, क्योंकि तू उसकी पत्नी है। इसलिए मैं ऐसी बड़ी दुष्टता करके परमेश्वर के विरुद्ध पाप क्यों करूँ?"
22 इसलिए बंदीगृह के दारोगा ने बंदीगृह के सब कैदियों को यूसुफ के हाथ में सौंप दिया; और वहाँ का सारा कार्य उसी की आज्ञा से होता था। 23 यूसुफ के अधिकार में जो कुछ था उसमें से कोई भी कार्य बंदीगृह के दारोगा को देखना नहीं पड़ता था, क्योंकि यहोवा यूसुफ के साथ था। वह जो कुछ करता था, यहोवा उसे सफल करता था।