परमेश्वर के पुत्र और मनुष्य की पुत्रियाँ
1 फिर ऐसा हुआ कि जब मनुष्य पृथ्वी पर बढ़ने लगे और उनके पुत्रियाँ उत्पन्न हुईं, 2 तब परमेश्वर के पुत्रों ने मनुष्य की पुत्रियों को देखा कि वे सुंदर हैं, और उन्होंने जिस-जिस को चाहा उसे अपनी पत्नी बना लिया। 3 तब यहोवा ने कहा, "मेरा आत्मा मनुष्य के साथ सदा बना6:3 अक्षरशः संघर्ष करता न रहेगा, क्योंकि वह तो शरीर है; उसकी आयु एक सौ बीस वर्ष की होगी।" 4 उन दिनों में पृथ्वी पर दानव6:4 इब्रानी में "नपीली" रहते थे, और बाद में भी थे जब परमेश्वर के पुत्रों ने मनुष्यों की पुत्रियों के पास जाकर उनसे संतान उत्पन्न की। ये प्राचीनकाल के शूरवीर और सुप्रसिद्ध मनुष्य थे।
दंड की घोषणा
5 तब यहोवा ने देखा कि पृथ्वी पर मनुष्य की दुष्टता बढ़ गई है, और उसके मन का प्रत्येक विचार निरंतर बुरा ही होता है। 6 तब यहोवा पृथ्वी पर मनुष्य को बनाकर खेदित हुआ—वह मन में बहुत दुःखी था। 7 फिर यहोवा ने कहा, "मैं मनुष्य को जिसे मैंने रचा है पृथ्वी पर से मिटा डालूँगा, बल्कि मनुष्य के साथ-साथ पशुओं, रेंगनेवाले जंतुओं और आकाश के पक्षियों को भी; क्योंकि मैं उन्हें बनाकर खेदित हुआ हूँ।" 8 परंतु यहोवा की कृपादृष्टि नूह पर बनी रही।
नूह
9 नूह की वंशावली यह है। नूह धर्मी पुरुष और अपने समय के लोगों में खरा था; वह परमेश्वर के साथ-साथ चलता था।