अपने विरुद्ध पाप करनेवाले भाई के प्रति व्यवहार
15 "यदि तेरा भाई तेरे विरुद्ध पाप करे, तो तू जाकर उसे अकेले में समझा। यदि वह तेरी सुने, तो तूने अपने भाई को पा लिया; 16 परंतु यदि वह न सुने, तो एक या दो जन को अपने साथ ले जा, ताकि हर बात की पुष्टि दो या तीन गवाहों के मुँह से हो जाए। 17 फिर भी यदि वह उनकी न माने, तो कलीसिया से कह; और यदि वह कलीसिया की भी न माने, तो वह तेरे लिए गैरयहूदी और कर वसूलनेवाले के समान ठहरे।