9 "अतः तुम इस प्रकार प्रार्थना करो :
हे हमारे पिता,
तू जो स्वर्ग में है,
तेरा नाम पवित्र माना जाए।
10 तेरा राज्य आए,
तेरी इच्छा जैसे स्वर्ग में पूरी होती है,
वैसे पृथ्वी पर भी हो।
11 हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे;
12 और जिस प्रकार हमने अपने अपराधियों को क्षमा किया है,
वैसे ही तू भी हमारे अपराधों को क्षमा कर।
13 हमें परीक्षा में न पड़ने दे,
बल्कि बुराई से बचा।
[क्योंकि राज्य और सामर्थ्य और महिमा सदा तेरे ही हैं। आमीन।]