अन्य चेतावनियाँ
1 हे मेरे पुत्र, यदि तूने अपने पड़ोसी की जमानत दी हो
अथवा किसी परदेशी की जिम्मेदारी ली हो,
2 और तू अपनी ही बातों के जाल में फँस गया हो,
तथा अपने ही वचनों से पकड़ा गया हो,
3 तो हे मेरे पुत्र, तू ऐसा कर कि अपने आपको बचा ले;
क्योंकि तू अपने पड़ोसी के हाथ में पड़ गया है,
इसलिए जा और नम्र होकर अपने पड़ोसी को मना ले।
4 तू न तो अपनी आँखों में नींद,
और न अपनी पलकों में झपकी आने दे।
5 तू स्वयं को हरिण के समान शिकारी के हाथ से,
और पक्षी के समान बहेलिए के हाथ से बचा ले।