ख़ुदा के लोगों के लिये अराम का वादा
1 पस जब उसके आराम में दाख़िल होने का वादा बाक़ी है तो हमें डरना चाहिए ऐसा न हो कि तुम में से कोई रहा हुआ मालूम हो 2 क्यूँकि हमें भी उन ही की तरह ख़ुशख़बरी सुनाई गई, लेकिन सुने हुए कलाम ने उनको इसलिए कुछ फ़ाइदा न दिया कि सुनने वालों के दिलों में ईमान के साथ न बैठा।
7 तो फिर एक ख़ास दिन ठहर कर इतनी मुद्दत के बाद दा’ऊद की किताब में उसे आज का दिन कहता है। जैसा पहले कहा गया,
"और आज तुम उसकी आवाज़ सुनो,
तो अपने दिलों को सख़्त न करो।"
11 पस आओ, हम उस आराम में दाख़िल होने की कोशिश करें, ताकि उनकी तरह नाफ़रमानी कर के कोई शख़्स गिर न पड़े।