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अय्यूब 16

अय्यूब का पांचवा बयान: इलिफ़स को जवाब

1 तब अय्यूब ने जवाब दिया,

2 "ऐसी बहुत सी बातें मैं सुन चुका हूँ,

तुम सब के सब निकम्मे तसल्ली देने वाले हो।

3 क्या बेकार बातें कभी ख़त्म होंगी?

तू कौन सी बात से झिड़क कर जवाब देता है?

4 मैं भी तुम्हारी तरह बात बना सकता हूँ:

अगर तुम्हारी जान मेरी जान की जगह होती तो मैं तुम्हारे ख़िलाफ़ बातें बना सकता,

और तुम पर अपना सिर हिला सकता।

5 बल्कि मैं अपनी ज़बान से तुम्हें ताक़त देता,

और मेरे लबों की तकलीफ़ तुम को तसल्ली देती।

6 "अगर्चे मैं बोलता हूँ लेकिन मुझ को तसल्ली नहीं होती,

और मैं चुप भी हो जाता हूँ, लेकिन मुझे क्या राहत होती है।

7 लेकिन उसने तो मुझे दुखी कर डाला है,

तूने मेरे सारे गिरोह को तबाह कर दिया है।

8 तूने मुझे मज़बूती से पकड़ लिया है, यही मुझ पर गवाह है।

मेरी लाचारी मेरे ख़िलाफ़ खड़ी होकर मेरे मुँह पर गवाही देती है।

9 उसने अपने ग़ुस्से से मुझे फाड़ा और मेरा पीछा किया है;

उसने मुझ पर दाँत पीसे,

मेरा मुख़ालिफ़ मुझे आँखें दिखाता है।

10 उन्होंने मुझ पर मुँह पसारा हैं,

उन्होंने तनज़न मुझे गाल पर मारा है;

वह मेरे ख़िलाफ़ इकट्ठे होते हैं।

11 ख़ुदा मुझे बेदीनों के हवाले करता है,

और शरीरों के हाथों में मुझे हवाले करता है।

12 मैं आराम से था, और उसने मुझे चूर चूरकर डाला;

उसने मेरी गर्दन पकड़ ली और मुझे पटक कर टुकड़े टुकड़े कर दिया:

और उसने मुझे अपना निशाना बनाकर खड़ा किया है।

13 उसके तीर अंदाज़ मुझे चारों तरफ़ से घेर लेते हैं,

वह मेरे गुर्दों को चीरता है, और रहम नहीं करता,

और मेरे पित को ज़मीन पर बहा देता है।

14 वह मुझे ज़ख़्म पर ज़ख़्म लगा कर खस्ता करता है

वह पहलवान की तरह मुझ पर हमला करता है:

15 मैंने अपनी खाल पर टाट को सी लिया है,

और अपना सींग ख़ाक में रख दिया है।

16 मेरा मुँह रोते रोते सूज गया है,

और मेरी पलकों पर मौत का साया है।

17 अगर्चे मेरे हाथों ज़ुल्म नहीं,

और मेरी दुआ बुराई से पाक है।

18 ऐ ज़मीन, मेरे ख़ून को न ढाँकना,

और मेरी फ़रियाद को आराम की जगह न मिले।

19 अब भी देख, मेरा गवाह आसमान पर है,

और मेरा ज़ामिन 'आलम — ए — बाला पर है।

20 मेरे दोस्त मेरी हिकारत करते हैं,

लेकिन मेरी आँख ख़ुदा के सामने आँसू बहाती है;

21 जिस तरह एक आदमी अपने दौसत कि वकालत करता है

उसी तरह वह ख़ुदा से आदमी कि वकालत करता है

22 क्यूँकि जब चंद साल निकल जाएँगे,

तो मैं उस रास्ते से चला जाऊँगा जिससे फिर लौटने का नहीं।

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