14 देखो, यह तो उसकी राहों के सिर्फ़ किनारे हैं,
और उसकी कैसी धीमी आवाज़ हम सुनते हैं।
लेकिन कौन उसकी क़ुदरत की गरज़ को समझ सकता है?"
14 देखो, यह तो उसकी राहों के सिर्फ़ किनारे हैं,
और उसकी कैसी धीमी आवाज़ हम सुनते हैं।
लेकिन कौन उसकी क़ुदरत की गरज़ को समझ सकता है?"