2 बेवक़ूफ़ समझ से ख़ुश नहीं होता,
लेकिन सिर्फ़ इस से कि अपने दिल का हाल ज़ाहिर करे।
13 जो बात सुनने से पहले उसका जवाब दे,
यह उसकी बेवक़ूफ़ी और शर्मिन्दगी है।
17 जो पहले अपना दा’वा बयान करता है रास्त मा’लूम होता है,
लेकिन दूसरा आकर उसकी हक़ीक़त ज़ाहिर करता है।