सदा काल लक रहनवालो को दर्सन
9 मी न देखतो देखतो अंत म का देखो, कि सिंहासन रखो गयो, अऊर कोई अति पुरानो विराजमान भयो; ओ को कपड़ा हिम को जसो उजलो, अऊर मुंडी को बाल सुध्द ऊन सरी को हतो; ओको सिंहासन आगी अऊर ओको पहिया हुन धधकतो हुयो आगी को से दिखई पड़ह है। 10 ऊ पुरानो को जोने आगी को धारा निकल ख बह रही हती; फिर हजारो हजार इंसान ओकी सेवा टहल कर रया हता, अऊर लाखो लाख इंसान ओको हाजिर हतो; फिर न्यायी बैठ गया, अऊर किताब हुन खोली गयी।