हन्नाह का प्रार्थना गीत
1 फिर हन्नाह ने यह प्रार्थना गीत गाया:
"मेरा हृदय याहवेह में आनंद कर रहा है;
याहवेह ने मेरे सींग को ऊंचा किया है,
मैं ऊंचे स्वर में शत्रुओं के विरुद्ध बोलूंगी,
क्योंकि मैं अपनी जय में आनंदित हूं.
2 "पवित्रता में कोई भी याहवेह समान नहीं है;
आपके अलावा दूसरा कोई भी नहीं है;
हमारे परमेश्वर समान चट्टान कोई नहीं.
3 "घमण्ड़ की बातें अब खत्म कर दी जाए,
कि कोई भी अहंकार भरी बातें तुम्हारे मुंह से न निकले,
क्योंकि याहवेह वह परमेश्वर हैं, जो सर्वज्ञानी हैं,
वह मनुष्य के कामों को परखते रहते हैं.
4 "वीरों के धनुष तोड़ दिए गए हैं,
मगर जो कमजोर थे उनका बल स्थिर हो गया.
5 वे, जो भरपेट भोजन कर संतुष्ट रहते थे, वे अब मजदूरी पाने के लिए काम ढूंढ़ रहे हैं.
मगर अब, जो भूखे रहा करते थे, भूखे न रहे.
वह जो बांझ हुआ करती थी, आज सात संतान की जननी है,
मगर वह, जो अनेक संतान की माता है, उसकी स्थिति दयनीय हो गई है.
6 "याहवेह ही हैं, जो प्राण ले लेते तथा जीवनदान देते हैं;
वही अधोलोक में भेज देते, तथा वही जीवित करते हैं.
7 याहवेह ही कंगाल बनाते, तथा वही धनी बनाते हैं;
वही गिराते हैं और वही उन्नत करते हैं.
8 वह निर्धन को धूलि से उठाते हैं,
वही दरिद्रों को भस्म के ढेर से उठाकर उन्नत करते हैं;
कि वे प्रधानों के सामने बैठ सम्मानित किए जाएं,
तथा वे ऊंचे पद पर बैठाए जाएं.
"पृथ्वी की नींव याहवेह की है;
उन्होंने इन्हीं पर पृथ्वी की स्थापना की है.
9 वह अपने श्रद्धालुओं की रक्षा करते रहते हैं,
मगर दुष्टों को अंधकार में निःशब्द कर दिया जाता है.
"क्योंकि कोई भी व्यक्ति अपने बल के कारण विजयी नहीं होता;
10 याहवेह के विरोधी चकनाचूर कर दिए जाएंगे.
याहवेह स्वर्ग से उनके विरुद्ध बिजली गिराएंगे;
याहवेह का न्याय पृथ्वी के एक छोर से दूसरे तक होता है.
"वह अपने राजा को शक्ति-सम्पन्न करते हैं,
तथा अपने अभिषिक्त के सींग को ऊंचा कर देते हैं."