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2 राजा 4

िधवऔर

1 भवियदवकडल भवियवकें एक पतएली, "आपकवक, पति ै. आपकि आपकवक मन ें हविितनभय ा. अब लत यह ि िसकवह करवह ों ों अपनबनिखड़ा ै."

2 एलउससा, "ैं िकरूं? बता-रह गयघर ें?"

उस उततर िा, "आपकिघर ें अब एक अलबचनहीं रह गयै."

3 एलउससकहा, "और अपनसभपड़ोिों बरतन ांऔर रहि बरतन िनतें कम ों. 4 तब उनें अपनों कमरें चलऔर दरवकर ा. तब इन सभबरतनों ें उणलनकरना. बरतन भर उनें अलग रखता."

5 तब वह वहां चलगई. अपनों कमरें कर उसनदरवकर िा. वह बरतनों ें लतगई और उसकमनबरतन गए. 6 जब बरतन भर े, उसनअपनकहा, "और बरतन आओ!"

इसकउततर ें कहा, "अब बरतन नहीं ै." तब थम गई.

7 उसनपरमवर जन इस बर ी. और परमवर जन उस आदिा, ", यह चकर अपनकरभर ो." रह , उससऔर ़ाकरें.

एलनरवन

8 एक िएलपर गए. वहां एक धनरहती. उसनएलिनतकरकजन पर ा. इसकजब कभएलवहां े, वहीं कर जन कर े. 9 उस अपनपति कहा, "ि, अब ैं यह समझ गई ूं ि यह यकि, हमइसकरतैं, परमवर पविजन ैं. 10 हम छत पर ें उठकर एक कमरबनें, उनकिवहां एक िा, एक एक और एक पक रख ें, ि जब कभवह यहां आएं, वहां ठहर सकें."

11 एक िएलवहां आए और उनोंउस कमरें कर आरिा. 12 उनोंअपनवक हज़ी कहा, "." वह आकर उनकमनखड़ी गई. 13 एलहज़ी आदिा, "उससकहो, ि, आपनहम ों रखनियह सब कषिै; आपकििसकतै? आप हतैं ि ििषय ें मनआपकरख, पति िनत?’ "

उस उततर िा, "ैं अपनों ें रह रहूं!"

14 तब उनोंा, "तब इस ििसकतै?"

हज़ी उततर िा, "उसकनहीं ै, और उसकपति ढलतउमयकि ैं."

15 एलकहा, "उसयहां ." जब वह आकर पर खड़ी गई, 16 एलउससकहा, "अगलइससम ें लगभग इससमय ें एक ा."

वह कहनलगी, "नहीं, ी! परमवर जन, अपनिआशि."

17 उस गरभधरण िऔर अगलउससमय वसनसम ें उसनएक जनिा—एलउससकहा.

18 बड़ा वह लक, एक िकटनकर रहमजदों अपनिचलगया. 19 अचनक उसनअपनिकहा, "अरे, ि! ि!"

िअपनवक आदिा, "इसइसक." 20 वक उस लक उठऔर उसकगया. वह लक पहर तक अपनें रहऔर वहीं उसकगई. 21 उस लक ऊपर कर उस परमवर जन िपर ििऔर दरवकरकचलगई.

22 तब उसनअपनपति यह ा, "अपनएक वक और गधिि ैं जलपरमवर जन ेंटकर आऊं."

23 पति रशिा, "आज ों रहो? आज नयांै, और शब."

उसकउततर ा, "सब शल ा."

24 तब उसनगधिऔर अपनवक आदिा, "गधांो! िरफ़्, जब तक ैं इसकिआदूं." 25 वह चल पड़ी और करपरवत पर परमवर जन घर तक पहुंगई.

जब परमवर जन उसअपनओर आता, उनोंअपनवक हज़ी कहा, "वह ो! ी! 26 उससिलनि़ो और उससो, आप सकशल ैं? आपकपति सकशल ैं? आपकसकशल ै?’ "

उसनउसउततर िा, "सभसकशल ै."

27 तब, वह परवत पर परमवर जन पहुंी, उसनएलपकडि. जब हज़ी उसहटवहां पहुंा, परमवर जन उससकहा, "ऐसकरो, ोंि इसकमन दरभरै. इसकें हवचननहीं ै, इस्‍रखै."

28 तब उस कहनिा, "अपनिनतैंी? ैंकहा, आशि?’ "

29 एलहज़ी आदिा, "कमर कस और अपनऔर चल पड़ो! ें अगर िउससल-चननिकना. यदि ें नमसकरउसकउततर ा. कर उस लक ुंपर रख ा."

30 तब लक एलकहा, "िहवशपथ और आपकशपथ, ैं आपकिूंी!" तब एलउठऔर उस चल ि.

31 हज़ी आगे-आगकर लक ुंपर िी, मगर वहां आविगयऔर उसमें वन लकषण ििा. तब हज़ी टकर एलबर ी, "लक नहीं!"

32 जब एलघर ें रविा, वह मरलक उनकिपर िा. 33 तब एलकमरतर चलगए और दरवकर िा, ों हर े. एलहवथनी. 34 तब वह कर लक ऊपर गए. उनोंअपनलक पर रखा, उनकें लक ों पर और उनकलक ों पर. जब वह उस लक पर गए, तब लक शरें गरआनलगी. 35 िवह उतरऔर घर तर टहलतरहे. तब वह िपर चढगए और लक पर गए. इससउस लक ींआई और उसनें ीं.

36 एलहज़ी और आदिा, "." तब हज़ी उसा. जब वह तर आई, उनोंउस कहा, "उठअपनो." 37 वह आई और ि ओर ककर एलों पर िपड़ी. इसकउसनअपनें उठऔर वहां चलगई.

एलतक जन ि

38 एलिलगनगर गए. इस समय ें अका. भवियदवकडल इस समय उनकमना. एलअपनवक आदिा, "एक बड़े बरतन ें भवियदवकडल िजन करो!"

39 एक भवियदवकहर कर ों ें ग-पइकटिा. वहीं उसएक गललतिी, िससउसनबड़ी ें गलफल इकटकर ि. उसनइनें टकर पकबरतन ें िा. उसयह ि फल े. 40 जब परसनिजन िगयऔर उनोंजन िा, िउठे, "परमवर जन, इस ां़ी ें ै!" जन कर सके.

41 एलआदिा, "़ा आटआओ." उनोंउस आटउस बरतन ें और कहा, "अब इसइनें परो, ि इससके." बरतन जन ा.

अतििों ििां

42 ल-शमक एक यकि आकर परमवर जन उपज रथम फल बनगई िां और ें ें कर ेंें ीं. एलआदिा, "यह सब भवियदवकडल भवियवकें ांिि जन कर ें."

43 वक रशिा, "यह जन यकिों मनरख?"

एलअपनआदहरा, "यह जन भवियदवकडल भवियवकपरो, ि इससकें, ोंि यह हवै, उनककनजन रह एगा.’ " 44 तब वक जन परिा. कर ्‍और जन रह गया; हवकहा.

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