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2 Reis 6

़ी नरि

1 भवियवकदल एलिनती, "ि, आपकहमिठहरगयघर अब पडरहै! 2 हमें आजिि हम सब यरदन नदतट पर और हममें हर एक वहां एक-एक बलऔर हम वहां अपनिघर बने."

एलआजी, "."

3 उनमें एक एलिनती, "अपनवकों चलनि."

एलां कह िा, "अचा, ैं चलूंा." 4 तब वह उनकचलगए.

जब यरदन तट पर आए, उनोंटनिा. 5 उनमें एक भवियदवकबलरहतब उसक़ी ें िी. वह भवियदवकिउठा, "ओह, ी! वह उधी."

6 इस पर परमवर जन उससा, "िजगह पर िवह?" जब उसनउनें वह जगह ि, भवियदवकएक छड़ी और उस जगह पर ेंी. वह पर रनलगी. 7 एलउसआदिा, "इसउठो." तब उसनबढ़ाकर उसउठिा.

़े और अगिरथ

8 उस पर, जब अरइसएल करता, उसनअपनवकों सलअनिणय िा, "अमजगह पर ा."

9 परमवर जन इसएल यह ा: "वधरहि! अरवहीं पहुंरहै, तब उस िकट कर इएगा." 10 इसएल उसअपनकरता, िसकिषय ें उसपरमवर जन चनिी. इस रकउसवनिलतरहती, फलसवरवह अपनआपकरककर ा. यह अन.

11 इससअरमन बहघबरगया. उसनअपनवकों सभकर उनसरशिा, "ा, आप यह बति हममें ै, इसएल ओर ै?"

12 एक वक उततर िा, "नहीं, मह. ां, इसएल ें एक भवियदवकै—एला, वह इसएल आपकआपककमरें कहगए शबों तक चनै."

13 अरआदिा, ". करकहां यह भवियदवका, ि ैं िउसपकडसकूं." ििगया, 14 "मह, वह भवियदवकें िै." उस ि़े, रथ और एक बड़ी िकड़ी ी. ें वहां पहुंचकर उनोंउस नगर िा.

15 तडजब परमवर जन वक ा, उसनहर कर ि ा, ़े और रथ नगर ैं. वक कह उठा, ", ी! अब हम करें?"

16 एलउततर िा, "डरमत! ोंि े, हमैं, िनतें उनसअधिैं, उनकैं."

17 तब एलयह थनी: "हव, कर इसि ि, ि यह सके." तब हवउस वक ि और उसनएलों ओर पह़ों और अगिरथों भरा.

18 जब अरएलपकडिआगबढ़ी, एलहवयह थनी: "कर इन ों ि ि." तब एलथनअनहवउनें कर िा.

19 उनें एलकहा, "यह वह और यह वह नगर. आओ, ैं ें उस यकि तक ा, िरहो." तब एलउनें शमरिपहुंिा.

20 उनोंशमरिें रविा, एलथनी, "हवइन यकिों ि िि अब सकें." तब हवउनें ि रदी. उनोंऔर ि शमरिें ैं.

21 इसएल उनें ा, वह एलकहनलगा, "िी, ा, हम उन पर करें? बतइए, हम उन पर करें?"

22 एलउततर िा, "उन पर हमलकरनसहा. ा, उन िों हतै, िें तलवऔर धनबनो? उनें जन परि ा-कर ्‍ं, और अपनं." 23 तब उनकिएक उततम िगया. जब ा-कर ्‍गए, इसएल उनें ििा, और अपनगए. इस घटनअरिकभइसएल पर हमलकरननहीं आए.

न-हदद शमरि

24 समय , अरन-हदद अपनऔर शमरिपर हमलिऔर नगर कर ी. 25 शमरिें इस समय भयकर अकगया. शतइसरखा. िि ऐसि गधिांअसों ें और एक कबतर ांें रही.

26 एक िइसएल नगर शहरपनपर चलतरहा, एक उससवर ें कहा, "मह, ी, सहयति."

27 उततर िा, "यदि हवसहयतनहीं करते, ैं सहयतकर सकतूं, ा, खलिर-रस ुंे?" 28 िआगयह ा, "तकलें?"

उततर िा, "इस झसकहा, आज अपनि वह हमआज जन , कल हमजन एगा.’ 29 तब हमनपककर िा. सरिैंइसिा, अपनो, ि वह हमजन .मगर इसनअपनििै."

30 जब उस शबे, उसनअपनकपड़े ि. इस समय वह शहरपनपर टहल रहा. ों यह सब ा. उनोंइस पर िि वह जसवसों तर पहना. 31 षणी, "परमवर ऐसी, बलि इससकड़ा यवहकरें, यदि आज एलिउसकधडलगरह ."

32 एलअपनघर ें े, उनकनगर रनिे. इस समय यहीं रहा. अभवह यकि यहां नहीं पहुंा, मगर एलअपनरनिों कह रहे, "ो, इस हतो, उसनिउड़ािएक ै! ऐसि, वह यहां पहुंे, दरवकर ें और उसअचतरह िरखें. उसकउससअधिनहीं ा."

33 एलउनसयह कह रहे, ि उस उनकआकर उनसकहा, "यह बत हवओर ै. अब ैं आगहवतजऔर ों करतरहूं?"

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