8 इन चारों प्राणियों में प्रत्येक के छः-छः पंख थे. उनके अंदर की ओर तथा बाहर की ओर आंखें ही आंखें थी. दिन-रात उनकी बिना रुके स्तुति-प्रशंसा यह थी:
"पवित्र, पवित्र, पवित्र,
प्रभु सर्वशक्तिमान परमेश्वर!
जो थे, जो हैं और जो आनेवाले हैं."4:8 यशा 6:3
8 इन चारों प्राणियों में प्रत्येक के छः-छः पंख थे. उनके अंदर की ओर तथा बाहर की ओर आंखें ही आंखें थी. दिन-रात उनकी बिना रुके स्तुति-प्रशंसा यह थी:
"पवित्र, पवित्र, पवित्र,
प्रभु सर्वशक्तिमान परमेश्वर!
जो थे, जो हैं और जो आनेवाले हैं."4:8 यशा 6:3