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Ezequiel 16

शलएक यभिपतें

1 हवयह वचन आया: 2 "मन, शलउसकिों ििकर3 और कहो, परम रधहवशलयह कहनै: रखऔर जनकनिों ें ; िएक अमऔर ां एक िी. 4 जनसमय ि़ी गई, और ें नहलकर िगया, ें नमक रगड़ा गया, और ें कपड़ों ें लपगया. 5 िइनमें करनिपर दयि नहीं ी, सहि नहीं ि. बलि ें हर ें ेंिगया, ोंि जनिें समझगया.

6 " तब ैं वहां कर जरऔर ें अपनें टता, और ि अपनें ी, ैंमसकहा, "िरहो!" 7 ैंें एक तरह बढ़ाा. बढगई और िकसिऔर वन अवसें आई. तन िकसिऔर गए, ििलकिवसी.

8 " ें, ैं वहां कर जरा, और ैंि करनयक बड़ी ी, अतैंअपनकपड़े ऊपर िऔर शरांिा. तब ैंमससतयनिशपथ और एक ांी, और गई, परम रधहवषणै.

9 " तब ैंें नहलऔर पर लगतथशरपर लगा. 10 ैंें कस़े वसपहनऔर ांों पर उचदरचमड़े िां पहन. ैंें ुंदर मलमल कपड़े पहनऔर ें मतकपड़े ओढ़ा. 11 ैंगहनों ृंिा: ैंों ें गन और गलें पहना, 12 और ैंें नथनी, ों ें िां और िपर एक ुंदर पहना. 13 इस रकऔर ांृंिगया; कपड़े ुंदर मलमल, हगवट और कसिे. जन ें शहद, और सबसअचआटा. बहुंदर गई और बननगई. 14 और ुंदरतरण रसिि ि-ि ों ें गई, ोंि ैंें ी, उसनुंदरतपरिकर िा, परम रधहवषणै.

15 " परमनअपनुंदरतपर भरिऔर अपनरसिि उपयएक बननें िा. कर जरा, मनउस पर बहि, और ुंदरतउसिा. 16 मनअपनकपड़ों कर भडबन, और वहां ि करतरही. उसकगई, और उसनुंदरतपर अधिकर िै. 17 मनिउन ुंदर गहनों िा, और ांबने, और मनअपनिष-मिां बनीं और उन िों यभिकरनलगीं. 18 और मनअपनकसिकपड़े कर उनकपहन, और मनऔर उनकचढ़ा. 19 और वह जन ैंमकििा—आटा, और शहदमनइसउनकमनएक िें चढ़ाा. ऐसै, परम रधहवषणै.

20 " और मनअपनउन और िों िा, िें मनििे, और उनें उन िों िजन ें चढ़ा िा. ि पर्‍नहीं ी? 21 मनबचों वध िऔर उनें इन िों चढ़ा िा. 22 अपनइन सब िों और ि , मनअपनबचपन उन िों िा, जब और अपनें रही.

23 " ि! िपर, परम रधहवषणै. अपनसब टतअला, 24 मनअपनिएक बनिऔर हर एक पर अपनिएक ा-थल बनै. 25 हर एक गलपर मना-थल बनिैं और वहां रनों मनबढरवि अपनों कर अपनुंदरतअपमिै. 26 मनबड़े जननांों िऔर अपनपड़ोिों यभििै, और अपनबढरवि मनभडै. 27 इसलिैंअपनिउठऔर घटिै, ैंें शतपर िै, अरिििों िों पर, िें यभिआचरण रण धकलगै. 28 मनअशिों यभििै, ोंि ें नहीं ा; और उसक29 तब मनअपनरवि बढ़ाकर उसमें िकर िा, िों एक ै, पर इससें .

30 " जब इस रकएक िलजतरह करतो, ैं भर ूं, परम रधहवषणै! 31 जब मनहर गलपर अपनबनऔर हर ें अपना-थल बनै, एक तरह ठहरी, ोंि मनिगयरकम असमिै.

32 " यभिपतो! अपनवयपति बदलअजनबिों पसकरतो! 33 सब उपहैं, परअपनसब िों उपहो, ि हर जगह अवहत िआएं. 34 इस रकि सरों ि उलटै; हत िनहीं गता. िलकउलटो, ोंि (ा) और ें नहीं िा.

35 " इसलिे, ा, हवो! 36 परम रधहवयह कहनै: ोंि मनअपनसनऔर अपनरवि ें अपनिों अपनिै, और सब ििों रण, और ोंि मनउन िों अपनबचों िै, 37 इसलिैं उन सब िों इकटकरनूं, िनकें िै, िनसमनिै, िनसमनिै. ैं उनें ों तरफ िइकटकरूंऔर उनकमनकपड़े उतूंऔर ें तरह ेंे. 38 ैं ें उन िों ूंयभिकरतैं और बहैं; ैं अपनऔर ईरमसबदलूंा. 39 तब ैं ें िों ों ें ौंूंा, और ों कर िेंऔर थलों नषकर ेंे. कपड़े उतेंऔर अचगहनआभषण ेंऔर ें िलकेंे. 40 िएक उपदरवआएे, पर पतथरवकरेंऔर ें अपनतलवों कड़े-कड़े कर ेंे. 41 घरों जलेंऔर बहिों खतें ें ेंे. ैं ि कर ूंा, और अपनिों नहीं ी. 42 तब िपडएगऔर ऊपर ईररहा; ैं ांऔर िनहीं करूंा.

43 " ोंि मनअपनजविों नहीं रखा, पर इन सब ों िा; इसलिमनिै, ििउन ों ैं िपर आऊा, परम रधहवषणै. अपनसब सरिों अलमनअशलतनहीं ी?

44 " हर एक यकि, कहवतों रयकरतै, वह ें इस कहवत रयकरा: "ां, ी." 45 अपनां सहो, िसनअपनपति और अपनबचों ा; और अपनबहनों सहबहन ो, िोंअपनपतिों और बचों ा. एक िऔर िएक अमे. 46 शमरिबड़ी बहन ी, अपनिों उततर ओर रहती; और बहन ै, अपनिों दकिओर रहती. 47 मनिउनकपद-चिों पर चलकर उनकिों नकल ी, पर जलअपनसब ों ें उनसरष्‍गई. 48 परम रधहवषणै, ैं अपनवन शपथ कर कहतूं, बहन तथउसकिों ऐसिकभनहीं िा, ि मनऔर िों िै.

49 " बहन यह ा: वह और उसकिां घमी, और ििंवन ी; गरों और रतमों सहयतनहीं करती. 50 घमभरऔर उनोंमनििा. इसलिैंउनें कर िि मनै. 51 शमरिमसआधनहीं िैं. मनउनसििैं, और िगयइन सब ों बहनें ििरहैं. 52 अपनकलउठरहो, ोंि मनअपनबहनों य-परकििै. ोंि उनकों रकि े, मसधरपडैं. इसलिलजिऔर अपनकलउठ, ोंि लनें बहनें धरपडैं.

53 " िी, ैं और उसकिों वन, शमरिऔर उसकिों वन, और ें वन बदलूंा, 54 ि अपनकलउठसकऔर उनकांवनकर मनिै, उससलजिो. 55 और बहनें, और उसकिां, और शमरिऔर उसकिां अपनपहलिि ें ी; और और िां अपनपहलिि ें आएी. 56 अपनअहिों ें, जब टतरगट नहीं ी, तब अपनबहन तक नहीं हती. 57 उसतरह, अब एदिों और उसकसब पड़ोिों और िििों िों—अपनों तरफ ों समझो. 58 ें अपनचतऔर िों रतिफल िा, हवषणै.

59 " परम रधहवयह कहनै: ैं यवहकरूंा, मनिै, ोंि मनसमझै. 60 ी, ैं उस रखूंा, िैंजविों ें ांी, और ैं सदतक बनरहनएक ांूंा. 61 तब अपनलचलन करकलजिी, जब अपनबड़ी और बहनों िी. ैं उनें मकिों ें ूंा, परयह ांगई आधपर नहीं ा. 62 इस रकैं अपनांूंा, और ि ैं हवूं. 63 तब, जब ैं िगयसब गलत ों षमकरूंा, तब करऔर लजिोंऔर अपमिरण िकभअपनुंनहीं ी, यह परम रधहवषणै.’ "

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