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Jó 28

कर

1 इसमें नहीं, ि वहां ां

तथएक ऐस, जहां वरकरतैं.

2 ें अलग िै,

तथचटें ांिघलै.

3 मनइसकें धकभरथल ें र-दतक ै;

वह धकें िचट

अथवधकभरथल.

4 मनघर वह गहरदतैं,

िें गम थलों ें पहुंचतैं;

तथगहरें लटकरहतैं.

5 ी-ै, हमें जन रदकरतै,

िंगरअगिमय ै.

6 ें चटें लमणि ैं,

ें वरिलतै.

7 यह िंसक पकिों नहीं ै,

और इस पर ि कभपड़ी ै.

8 इस पर ििं, ट-पपशकभनहीं चलैं,

और िंसक िंइस कभगयै.

9 मनचकमक पतथर परकरतै,

परवतों वह आधपलटै.

10 वह चटों ें िैं तथउनकि वहीं पडै,

जहां अमै;

11 जल रवकर वह ांखड़े कर ैं

तथवह अदा, उसरकिकर ैं.

12 रशयहउठति कहां िसकति?

कहां वह जहां समझ जडै?

13 मनइसकनहीं नतवस

िों ें यह नहीं ी.

14 गर गहरषणै, "झमें नहीं यह";

महगर पषकरतै, "ैंइसनहीं िा."

15 वरइसकनहीं िसकता,

ांकर इसकिरण भव नहीं ै.

16 ओफवरइसखरनहीं सकता,

अथवलमणि इसकिपर्‍ोंे.

17 वरएवफटिइसकतर पर नहीं पहुंसकते,

और दन आभषण इसकििमय भव नहीं ै.

18 ूंतथफटिमणिों यहां उलकरनयरै;

उपलबि िों कहीं अधिऊपर ै.

19 खरइसकबरबर नहीं सकता;

दन इसकांकन भव नहीं ै.

20 तब, कहां िउदगम?

कहां समझ ि?

21 तब यह पषि यह मनों ि िै,

ां, पकिों ि इसनहीं ै.

22 एवपषकहतैं

"अपनों हमनबस, इसकउलै."

23 परमवर इस तक पहुंचनै,

उनें इसक.

24 ोंि तक ि करतैं

तथआकहर एक वसउनकि ें ै.

25 जब उनोंरदि

तथजल आयतन ा,

26 जब उनोंि तय कर

तथगरजन और िजलिििकर ी,

27 तभउनोंइसतथइसकषण

उनोंइसिितथइसिा.

28 तब उनोंमनपर यह रकििा,

"इससमझ रभरति भय, यहि,

तथइयों बनरखनसमझदै."

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