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Jó 6

िों अयि

1 यह अययह कहा:

2 "यदि ़ा सकती,

इसतरें रखा!

3 तब इसकगर तट अधिा.

इसलिशबखतभरलगतैं.

4 ोंि सरवशकिैं,

उनकििसकर आतें पहुंरहै.

परमवर आतआकरमण ििखड़ा ै!

5 गलगधमनआकर ेंकतै?

बछड़ा अपनरमै?

6 िदरहिवसवन नमक िभव ै?

सफें ै?

7 ैं उनकपरनहीं हता;

ििजन-समैं.

8 "यदि अन

तथपरमवर लसकर े,

9 तब ऐसि परमवर चलनिततपर े,

ि वह बढ़ाकर कर े!

10 िंतब ै,

ैं असहदरें आनिूं,

ोंि ैंपविवचनों आदों िनहीं िै.

11 "शकि, ैं आशकरूं?

ियति, ैं रखूं?

12 बल वह ै, चटों ै?

अथवरचनांै?

13 सहयततर ें ििनहीं,

िि झसी?

14 "अपनुःिपर करनहीं िा,

वह सरवशकिपरमवर रति रदै.

15 जलधसमिसघरमि,

जलधं, िैं,

16 िनमें ििघल कर जल बनत

और उनकजल िै.

17 जलहांएवैं,

मऋतें अपनिैं.

18 अपनभटक ैं;

उसकमरि ें िैं.

19 दल उनें जतरहे,

िों उन पर आशरखी.

20 उन पर भरकर उनें पछत;

वहां पहुंऔर िगए.

21 अब िि यह ै, ि इनीं जलधसमो;

आतखकर डर ो.

22 ैंकभयह आगरह िै, े, अथवा,

अपनपति ें कर करो,

23 अथवा, शतधन करो,

इस उपदरव करनयकि अधि़ा ो?’

24 "िि, ैं रहूंा;

िां पर रकट कर ि.

25 सचें कहगए उदितनखदयक ैं!

िंआपकिरकट ै?

26 अभिकहनिंकरनै,

ियकि उदिररथक ैं?

27 िों िि

तथअपनिे.

28 "अब करऔर ओर ो.

िखनि ैं पर सकूंा?

29 अब अन;

यह सब, ैं अब सतयनिूं.

30 अनयपै?

झमें और अचरहा?

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