32 धर्मी में यह सहज बोध रहता है, कि उसका कौन सा उद्गार स्वीकार्य होगा,
किंतु दुष्ट के शब्द कुटिल विषय ही बोलते हैं.
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किंतु दुष्ट के शब्द कुटिल विषय ही बोलते हैं.
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