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सूक्ति संग्रह 2

ि

1 , यदि वचन कर

और आजअपनदय ें िकर रखो,

2 यदि अपनों रति तन

तथअपनदय समझदओर लगरखो;

3 वसयदि समझ आहकर

और समझ उचवर ें ो,

4 यदि इसकउसि कर

ांिऔर इसएक ्‍िि नतजतरहो,

5 तब ें एगि हवरति रदै,

तब ें परमवर ्‍एगा.

6 ोंि हवैं;

उनीं और समझ ें ैं.

7 खरिवह यथआरकिरखतैं,

उनकिवह रमिैं, िनकलचलन िै,

8 वह िपकषपरणरकबनरखतैं

तथउनकि उनकों लचलन पर लगरहतै.

9 , तब ें धरी, िपकषप,

हर एक सनऔर औचिपहचएगी.

10 ोंि तब दय ें बसा,

आतें आनकरा.

11 िणय-जकसकरा,

समझदें रकी.

12 ें और ऐसयकिों बचेंे,

िनकें िै,

13 धकरपवनशअपनि

खरलचलन ैं,

14 िें ों

तथरषटतें आनआतै,

15 िनकयवहिैं

िगड़े पर लचलन करतैं.

16 तब ें अनचरणे, उस अनषगिे,

िसकें ैं, रकिरखी,

17 िसनवसपरिकर ि

परमवर समकगई ै.

18 उसकघर-परिगरें समरहै,

उसकांअधपर ैं.

19 उसकगया, वह टकर कभसकता,

और उनमें वन सकतै.

20 , ें भलपर एग

और ें धरिों पर िरखा.

21 धरिों ्‍ा,

और े, धरैं, इसमें बनरहेंे;

22 िंजनों िएग

तथसमनषकर िएगा.

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