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सूक्ति संग्रह 18

1 िसनवयसमअलग कर िै, वह अपनअभिि ें ि्‍रहतै,

वह हर रकििमतै.

2 िकशलतें ि नहीं ी.

उसअपनियककरनरहतै.

3 ि रवै, चलआतै,

अपमिलजजती.

4 मनशबगहन जल समैं,

और िरविउमडनदसम.

5 पकउपयनहीं

और धरिरखना.

6 ों कलह रवै,

उनकुंें उनकिैं.

7 ों उनकिैं,

उनकउनकों ििैं.

8 सफहट ें उचगए शबिजन-समैं;

शबमनें समैं.

9 अपनििरति आलस

वह िसक यकि ै.

10 हवएक समै;

धरकर इसमें िऔर रकिबनरहतै.

11 धनयकि िउसकधन एक गढसमै;

उनकलगतैं ि उस पर चढिै!

12 इसकि िमनपर िरहो, उसकदय घमै,

पर आदर िलनपहलमननमै!

13 यदि िउततर लगे,

यह खतऔर लजिि ै.

14 अवसें मनमनबल उसरहतै,

िंदय सह सकतै?

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