2 विवेकशीलता में मूर्ख की कोई रुचि नहीं होती.
उसे तो मात्र अपने ही विचार व्यक्त करने की धुन रहती है.
2 विवेकशीलता में मूर्ख की कोई रुचि नहीं होती.
उसे तो मात्र अपने ही विचार व्यक्त करने की धुन रहती है.
2 मूर्ख तो समझदारी की बातों से नहीं,
बल्कि अपने ही मन की बातों को
प्रकट करने से प्रसन्न होता है।
2 मूर्ख का मन समझ की बातों में नहीं लगता,
वह केवल अपने मन की बात प्रगट करना चाहता है18:2 वह केवल अपने मन की बात प्रगट करना चाहता है: मूर्ख को सुख नहीं मिलता परन्तु अपनी ही बात पर बल देना, अपने बारे में और अपने विचार प्रगट करने में उसका परमानन्द है।।
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