सोलहवां सूत्र
19 मेरे बालक, मेरी सुनकर विद्वत्ता प्राप्त करो,
अपने हृदय को सुमार्ग के प्रति समर्पित कर दो:
20 उनकी संगति में न रहना, जो मद्यपि हैं
और न उनकी संगति में, जो पेटू हैं.
21 क्योंकि मतवालों और पेटुओं की नियति गरीबी है,
और अति नींद उन्हें चिथड़े पहनने की स्थिति में ले आती है.
सत्रहवां सूत्र
22 अपने पिता की शिक्षाओं को ध्यान में रखना, वह तुम्हारे जनक है,
और अपनी माता के वयोवृद्ध होने पर उन्हें तुच्छ न समझना.