सत्रहवां सूत्र
22 अपने पिता की शिक्षाओं को ध्यान में रखना, वह तुम्हारे जनक है,
और अपनी माता के वयोवृद्ध होने पर उन्हें तुच्छ न समझना.
23 सत्य को मोल लो, किंतु फिर इसका विक्रय न करना;
ज्ञान, अनुशासन तथा समझ संग्रहीत करते जाओ.
22 अपने पिता की शिक्षाओं को ध्यान में रखना, वह तुम्हारे जनक है,
और अपनी माता के वयोवृद्ध होने पर उन्हें तुच्छ न समझना.
23 सत्य को मोल लो, किंतु फिर इसका विक्रय न करना;
ज्ञान, अनुशासन तथा समझ संग्रहीत करते जाओ.