यिसै के डाली
1 यिसै के ठूंठ म ले एक डंगाल फूट निकलही;
ओकर जरी म ले एक ठन डंगाल ह फरही।
2 यहोवा के आतमा ओकर ऊपर ठहिरही—
येह बुद्धि अऊ समझ के आतमा,
युक्ति अऊ पराकरम के आतमा,
गियान के आतमा अऊ यहोवा के डर होही—
3 अऊ ओह यहोवा के डर म खुस होही।
ओह मुहूं देखके नियाय नइं करही,
या अपन कान ले सुनके निरनय नइं करही;
4 पर धरमीपन ले ओह जरूरतमंद के नियाय करही,
अऊ धरती के गरीबमन के निरनय सच्चई से करही।
ओह धरती ला अपन बचन के छड़ी ले मारही;
अऊ अपन फूंक के झोंका ले ओह दुस्टमन ला मिटा दीही।
5 धरमीपन ह ओकर पट्टा
अऊ बिसवासयोग्यता ह ओकर कनिहां के पट्टी होही।
6 भेड़िया ह मेढ़ा-पीला के संग रहिही,
अऊ चीतवा ह छेरी संग बईठही,
बछवा अऊ सेर अऊ पसु के पीला एक संग रहिहीं;
अऊ एक छोटे लड़का ह ओमन के अगुवई करही।
7 गाय अऊ भालू एके संग चरहीं,
ओमन के पीलामन एक संग बईठहीं,
अऊ सिंह ह बईला सहीं भूंसा खाही।
8 दूध पीयत लइका ह नाग सांप के बिल मेर खेलही,
अऊ छोटे लइका ह करैत के बिल म हांथ डालही।
9 मोर जम्मो पबितर पहाड़ ऊपर
न तो ओमन चोट पहुंचाहीं अऊ न ही नास करहीं,
काबरकि धरती ह यहोवा के गियान ले अइसन भर जाही
जइसन पानी समुंदर म भरे रहिथे।
10 ओ दिन यिसै के जरी ह मनखेमन बर एक झंडा होही; जाति-जाति के मनखेमन ओकर करा जूरहीं, अऊ ओकर अराम करे के जगह ह महिमामय होही।