4 घबरनवल मनखमन ल कहव, "मजबत बनव, झन डरव; तमहर परमसर ह आह ओह बदल लय बर आह; ईसवरय बदल क सग ओह तमहर उदधर कर बर आह।"
4 घबरनवल मनखमन ल कहव, "मजबत बनव, झन डरव; तमहर परमसर ह आह ओह बदल लय बर आह; ईसवरय बदल क सग ओह तमहर उदधर कर बर आह।"