5 अंधरामन के आंखी खोले जाही
अऊ भैंरामन के कान घलो खोले जाही;
6 तब खोरवा ह हिरन सहीं कूदही
अऊ कोंदामन अपन जीभ ले आनंद के मारे जय-जयकार करहीं।
काबरकि बंजर भुइयां म पानी के सोता फूट निकलही
अऊ मरू-भुइयां म नदी बोहाय लगही;
5 अंधरामन के आंखी खोले जाही
अऊ भैंरामन के कान घलो खोले जाही;
6 तब खोरवा ह हिरन सहीं कूदही
अऊ कोंदामन अपन जीभ ले आनंद के मारे जय-जयकार करहीं।
काबरकि बंजर भुइयां म पानी के सोता फूट निकलही
अऊ मरू-भुइयां म नदी बोहाय लगही;
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