6 अकास कोति आंखी उठाके देखव,
खाल्हे धरती ला देखव;
अकास ह धुआं के सहीं लोप हो जाही,
धरती ह ओनहा के सहीं जुन्ना हो जाही
अऊ येमा रहइयामन माछीमन कस मर जाहीं।
पर मोर उद्धार ह सदाकाल तक बने रहिही,
अऊ मोर धरमीपन के कभू अन्त नइं होही।
6 अकास कोति आंखी उठाके देखव,
खाल्हे धरती ला देखव;
अकास ह धुआं के सहीं लोप हो जाही,
धरती ह ओनहा के सहीं जुन्ना हो जाही
अऊ येमा रहइयामन माछीमन कस मर जाहीं।
पर मोर उद्धार ह सदाकाल तक बने रहिही,
अऊ मोर धरमीपन के कभू अन्त नइं होही।