4 "झन डर; तल लजजत हन नइ पडय। कलक क बत ल झन डर; तह अपमनत नइ हवस। त अपन जवन क लजज ल भल जब अऊ अपन बधवपन क अपमन ल फर सरत नइ करब।
4 "झन डर; तल लजजत हन नइ पडय। कलक क बत ल झन डर; तह अपमनत नइ हवस। त अपन जवन क लजज ल भल जब अऊ अपन बधवपन क अपमन ल फर सरत नइ करब।