6 "का येह ओ किसम के उपास नो हय, जेकर ले में खुस होथंव:
कि अनियाय के बंधना ला टोर दिये जावय
अऊ जुड़ा के बंधना ला खोलके
अतियाचार सहइयामन ला सुतंतर कर दिये जावय
अऊ हर एक जुड़ा ला टोर दिये जावय?
7 का येह ओ किसम के उपास नो हय, कि भूखन मन के संग खाना बांटे जावय
अऊ गरीब घुमंतू ला आसरय दिये जावय—
जब तुमन नंगरामन ला देखथव, त ओमन ला ओनहा पहिरावव,
अऊ अपन खुद के रिस्तेदारमन ले मुहूं झन मोड़व?