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यसायाह 58:6-9

6 "का येह ओ किसम के उपास नो हय, जेकर ले में खुस होथंव:

कि अनियाय के बंधना ला टोर दिये जावय

अऊ जुड़ा के बंधना ला खोलके

अतियाचार सहइयामन ला सुतंतर कर दिये जावय

अऊ हर एक जुड़ा ला टोर दिये जावय?

7 का येह ओ किसम के उपास नो हय, कि भूखन मन के संग खाना बांटे जावय

अऊ गरीब घुमंतू ला आसरय दिये जावय—

जब तुमन नंगरामन ला देखथव, त ओमन ला ओनहा पहिरावव,

अऊ अपन खुद के रिस्तेदारमन ले मुहूं झन मोड़व?

8 तब तुम्हर अंजोर ह बिहान पहाय सहीं चमकही,

अऊ तुम्हर चंगई ह जल्दी दिखही;

तब तुम्हर धरमीपन58:8 या तुम्हर धरमी जन ह तुम्हर आघू-आघू जाही,

अऊ यहोवा के तेज ह तुम्हर पाछू तुम्हर रकछा करही।

9 तब तुमन पुकारहू, अऊ यहोवा जबाब दीही;

तुमन मदद बर बिनती करहू, अऊ ओह कहिही: में इहां हंव।

"यदि तें अंधेर करई के जुड़ा के संग

अंगरी उठई अऊ दुस्ट बात करई के आदत ला छोंड़ देबे,

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