नवां अकास अऊ नवां धरती
17 "देखव, मेंह नवां अकास
अऊ नवां धरती के सिरिस्टी करहूं।
अऊ पहिली के चीजमन ला सुरता नइं करे जाही,
अऊ न ही ओमन मनखे के मन म आहीं।
18 एकर कारन जऊन कुछू के मेंह सिरिस्टी करथंव,
ओमा सदा खुस रहव अऊ आनंदित रहव,
काबरकि देखव, में यरूसलेम ला खुसी बर
अऊ येकर मनखेमन ला आनंद बर बनाहूं।
19 में यरूसलेम ऊपर आनंदित होहूं
अऊ अपन मनखेमन ले खुस होहूं;
येमा रोय अऊ नरियाय के अवाज
फेर सुनाई नइं पड़ही।
20 "ओमा फेर न तो कुछू दिन के लइका,
अऊ न अइसन बुढ़वा मरही
जऊन ह अपन उमर पूरा नइं करे होही;
काबरकि जऊन ह लड़कपन म मरइया हे
ओह सौ बछर के होके मरही,
पर जऊन ह सौ बछर के पहिले मरही,
ओह सापित समझे जाही।
21 ओमन घर बनाके ओमा बसहीं;
ओमन अंगूर के बारी लगाके ओकर फर खाहीं।
22 अइसन नइं होवय कि ओमन बनावंय अऊ दूसरमन ओमा बसंय,
या ओमन रूख लगांय, अऊ दूसरमन खावंय।
काबरकि जतका उमर रूख के होही,
ओतका मोर मनखेमन के उमर होही;
मोर चुने गय मनखेमन अपन हांथ के काम के
लम्बा समय तक आनंद उठाहीं।
23 ओमन के मेहनत ह बेकार नइं होवय,
न ओमन के लइकामन दुख झेले बर पईदा होहीं;
काबरकि ओमन यहोवा के दुवारा आसीसित मनखे होहीं,
ओमन अऊ ओमन के लइकामन घलो आसीसित होहीं।
24 ओमन के पुकारे के पहिली ही में ओमन ला उत्तर दूहूं;
ओमन के गोठियावत बेरा ही, में ओमन के सुन लूहूं।
25 भेड़िया अऊ मेढ़ा-पीला एके संग चरहीं,
अऊ सिंह ह बईला सहीं भूंसा खाही,
अऊ सांप के जेवन धुर्रा होही।
मोर जम्मो पबितर पहाड़ ऊपर
न तो कोनो चोट पहुंचाहीं अऊ न ही नुकसान करहीं,"
यहोवा ह कहत हे।