37पर ज़ै प्रोहता का शुझिए कि सह फिमशी हुई ठीक अर शराल़ बी आसा राम्बल़ै काल़ै, तै बोलै प्रोहत, ‘तूह आसा शुचअ।’
40,41"ज़ै कसरै मुंडे आजू-पिछ़ू किधी का बी शराल़ अल़ी करै निखल़अ होए, सह मणछ आसा ताम्बल़अ पर सह आसा शुचअ।
44‘अह आसा कोहल़, तूह हुअ ऐबै छ़ोतलअ।’