1 परमेशर बोला इहअ, "मेरी परज़ा लै दैआ हैअ-विश्वास!
2 एरुशलेम नगरीए लोगा लै बोला हैअ निं चोल़ा।
तिन्नां लै बोला कि तम्हैं काटी खास्सी खरी
अर ऐबै हुऐ थारै सारै पाप माफ।
तम्हैं हेरी मुंह बिधाता का आपणीं पापे सारी सज़ा भुगती।"
3 "शुन्नैं रेगीस्ताना का आसा कुंण हाक्का लाई इहअ बोल्दअ लागअ द,
‘प्रभू एछणें धैल़ी लै डाहा बाता शुंहीं-शोधी,
तेऊए सुआगत करना लै रहा सोभ तैर्हुई।’"
4 सोभी खागा भरा,
उछ़टी धारा करा धरनीं सरली।
बडी-बडी ज़ोता करा सऊंई,
उछ़टी-निंहंटी ज़ैगा हणीं बराबर च़कोर।
5 तेखअ हणअ बिधातो प्रतप्प प्रगट,
अर सह शुझणअ सोभी लोगा का।
बिधाता आसा आप्पै बोलअ द कि इहअ हणअ!
6 मुखा शुण्हुंअ हाक्का लाई आसा कुंण ज़ोरै-ज़ोरै बोल्दअ,
पर मंऐं पुछ़अ, "हुंह किज़ै समाद खोज़ूं सोभी का?"
सह बोल खोज़ा त इहअ समाद, "एही गल्ला खोज़ भिई कि सारै मणछ आसा घाहा ज़िहै,
तिन्नें शोभा हणीं बणें फूला ज़ेही झ़ट च़ारै खतम।
7 ज़ांऊं बिधाता बागरी छ़ाडा, घाह शुक्का
अर फूल मछैंआ पठी।
तिहै ई आसा मणछ बी घाहा ई ज़िहै।
8 घाह ता शुक्का अर फूल बी मछैंआं,
पर बिधाता ज़ुंण बैण बोलअ, सह हआ अटल़।
9 एरुशलेम नगरीए लोगो, उझै उखल़ा उछ़टी धारा लै
संघा खोज़ा सोभी का खुशीओ समाद!
सियोन नगरीए लोगो, ज़ोरै-ज़ोरै लाआ हाक्का,
संघा खोज़ा सोभी का खुशीओ समाद!
ज़ोरै-ज़ोरै खोज़ा अर डरी निं आथी!
यहूदा मुल्खे सोभी नगरीए लोगा का खोज़ा कि
थारअ परमेशर आसा एछणैं आल़अ।
10 भाल़ा! म्हारअ मालक बिधाता एछणअ आपणीं सारी शगती संघै एरुशलेम राज़ करदअ,
ज़ुंण तेऊ बच़ाऊऐ दै आसा तिंयां आणनैं तेऊ संघा अर
तिन्नां लै दैणअ तेऊ तेतो फल कि तिंयां हांढणै तेऊ आजू।
11 परमेशरा करनीं आपणीं हेल़्हीए फुआला ज़ेही फाज़त,
तेऊ करनै होछ़ै-होछ़ै मिम्मूं कठा संघा निंणै आपणीं भोसल़ै ढाकी,
तिन्नैं माआ नढैऊंणीं तेऊ सुलै-सुलै आजू।
12 समुंदरे पाणीं निं कुंण अंदल़ू करै बथैऊई सकदअ अर
नां कुंण सरगा बैथा करै नापी सकदअ!
पृथूईए सारी माट्टी निं कोहै लोहदी करै पथैऊई सकदअ,
नां कुंण बडी-बडी धारा तराकल़ी दी तोली सकदअ!
13 तेही ई निं बिधाता लै कोहै सलाह दैई सकदअ,
नां कुंणी तेऊ लै शिक्षा दैनी कि फलाणीं बाता हांढै!
14 बिधाता निं कोही का पुछ़दअ कि किहअ नसाफ करनअ,
नां तेऊ कहा का अक्ल अर समझ़णें ज़रुरत आथी कि
कुंण काम किहअ करनअ।
15 बिधाता सम्हनै निं कोहै देश किछ़ बी आथी,
तिंयां आसा तेऊ लै बाल्टी भितरी पाणींए टिप्पू ज़िहै,
समुंदरे बडै-बडै टापू बी आसा तेऊ लै शणैंऊंए धूल़ै ज़िहै हल़कै।
16 लाबानोन बणें सोभ ज़ीब बी आसा
बिधाता लै हूम बल़ी करना लै थोल़ै
तेते सोभ डाल़-बूट बी निं तेऊ लै आगी ज़ाल़णा लै पूरै हणैं।
17 सारै देश निं तेऊ सेटा किछ़ बी आथी, तिंयां आसा बृथा।
18 परमेशरे बारै निं कोहै खोज़ी सकदै कि सह किहअ आसा
या सह कहा ज़िहअ आसा!
19 सह निं कारीगीरै बणाईं दी काठे मुहुर्ती ज़िहअ आथी!
नां सह सनारै महल़ी दी कांस्से मुहुर्ती ज़िहअ आथी
ज़ुंण सुन्नैं करै हआ महल़ी दी अर थाल्लै का च़ंदी करै हआ सज़ाऊई दी!
20 ज़ुंण इहअ दाल़जी होए कि तेऊ का निं सुन्नैं-च़ंदीए मुहुर्ती लै ढब्बै ई पुगदै,
सह लोल़ा इहअ काठ ज़ुंण चिजदअ निं आथी,
संघा आणा सह ज़ाण-प्रबीण कारीगीर लोल़ी
तेखअ बझ़ैल़ा काठे एही मुहुर्ती खल़ी करनै ज़ुंण धरना लै नां ढुल़े!
21 तम्हां कै थोघ आथी निं?
तम्हां कोही निं खोज़अ कि पैहलकै ज़मानै किज़ै आसा बोलअ द?
तम्हैं कै शूणअ निं आथी कि संसार किहअ करै बणअ?
22 सह आसा परमेशर ज़ुंणी सारअ भ्रमंड बणाअं।
ज़ुंण पृथूई अर सरगा का उझै आपणीं राज़गाद्दी दी आसा बेठअ द,
उंधै पृथूई दी मणछ आसा तेऊ लै चिटा ज़िहै।
तेऊ छ़ैअ सरग दोहल़ू ज़िहअ अर
सह कशा तेता खिम्भा ज़िहअ।
23 परमेशर बशैल़ा धरतीए बडै-बडै राज़ै धरनीं
अर सह करा तिन्नां नांह बराबर।
24 तिंयां आसा एही बुटी ज़िहै
ज़ुंण एभै रोही अर अज़ी निं तिन्नें ज़लैल़ै बी माट्टै दी राझ़ै,
ज़ांऊं बिधाता बागरी छ़ाडा,
तिंयां शुक्का संघा निंयां बागरी तिन्नां भुखलै ज़ेही फर्ल़ाऊई।
25 पबित्र परमेशर बोला इहअ,
‘तम्हां कै खोज़णअ कि हुंह कहा ज़िहअ आसा?
मुंह ज़िहअ होर आसा बी कुंण?’
26 उझै दैआ सरगा बाखा भाल़णीं!
ज़ुंण तम्हां का एथ तारै शुझिआ, तिंयां कुंणी बणाऐं?
ज़ुंण इना सैना ज़िहै नढैऊआ,
सह गणा इना सोभी अर सह शादा इना सोभी इनै नाअं बोली!
सह आसा एतरअ महान अर
तेऊ का आसा इहअ महान बल कि
तिन्नां मांझ़ै निं एक बी शोठदअ आथी।
27 तम्हैं याकबे आद-लुआद खोज़ा एही खरी,
‘बिधाता का निं म्हारी आफ़त शुझदी,
तेऊ निं फिकर ई हंदी कि हाम्हां इज़राईली संघै निं शुचअ नसाफ हंदअ ई आथी।’
28 तम्हां का थोघ निं आथी? तम्हैं कधि निं शूणअ?
परमेशर बिधाता आसा अटल़,
सारअ संसार आसा तेऊ बणाअं द।
सह नां थकदअ अर नां तेऊओ शाह फुलदअ।
तेऊए सोठ निं कोहै कधि समझ़ी सकदअ।
29 सह दैआ तिन्नां लै बल ज़ुंण दुबल़ै अर थकै दै आसा।
30 खारकै मणछ सका थकी, तिन्नों सका शाह फुल्ली अर
तिंयां सका धरनीं बधल़ूई,
31 पर ज़ुंण बिधाते आसरै रहा, अर ज़ुंण तेऊ का मज़त मांगा,
तिन्नां भेटणअ ताज़अ ज़ोर।
तिन्नां लागणै मुक्षरलै ज़िहै नऊंऐं फैंख,
तिन्नां बाहणीं ठुहर पर तिन्नों शाह निं फुलणअ,
तिंयां निं हांढी-हांढी बी दुबल़ै हणैं।"