5 तिन्नां मणछा मांझ़ै रही ज़िऊआ आपणीं ज़िन्दगी समझ़कार रही ज़ुंण विश्वासी निं आथी अर हर मोक्कै समझ़ा किम्मती।
5 तिन्नां मणछा मांझ़ै रही ज़िऊआ आपणीं ज़िन्दगी समझ़कार रही ज़ुंण विश्वासी निं आथी अर हर मोक्कै समझ़ा किम्मती।