57 ज़िहअ ज़िऊंदै मेरै बाब परमेशरै हुंह आसा छ़ाडअ द, तेऊए करै आसा हुंह ज़िऊंदअ, तिहअ ई खाणअ हुंह तेऊ अर सह रहणअ मुंह करै ज़िऊंदअ।
58 "ज़ुंण रोटी स्वर्गा का आसा आई दी, सह निं दादै-बाबै खाअ द खाण आथी कि खाई करै मूंऐं, ज़ुंण ऐहा रोटी खाए सह रहणअ सदा ज़िऊंदअ।"