3 ताह लागअ तेरै आपणैं ई घमंडा करै धोखअ,
तेरी राज़धानी आसा बडी-बडी टोल्हा करै च़िणैं दै गहल़,
अर तूह आसा उछ़टी धारा बस्सअ द।
तूह करा एही शरेरी गल्ला, ‘मुंह निं इधा का उंधै कोह थुआल़ी सकदअ!’
3 ताह लागअ तेरै आपणैं ई घमंडा करै धोखअ,
तेरी राज़धानी आसा बडी-बडी टोल्हा करै च़िणैं दै गहल़,
अर तूह आसा उछ़टी धारा बस्सअ द।
तूह करा एही शरेरी गल्ला, ‘मुंह निं इधा का उंधै कोह थुआल़ी सकदअ!’