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2 Tessalonicenses 3

िथनकरन िनत

1 आखरऊग, आमरिथनकरनिरभअसबढ़े अनबड़ाे, जसममभय2 अनआमिरपट अन3:2दुस्ट लक बचयरहबहरभरनहि।

3 पर िरभभरि3:3 विस्वसनीय , मलपकिि लक उभकरअनलक बचयक4 आमिरभमरपर भरन-जहममलजन, ओलअनसचमनतरवहबि

5 परमवर अनमसरज कन, िरभमरमन आन कन

आलसिवन

6 आममलआपरिरभमसलक जन हर एक असलक रवहनिगड़ी 3:6 अनुचित चाल जसचलन रवहसिओनआमलक इसओकजसनहकरे। 7 आपच ईसिलक आमरजसचलनहसे। ि आमरलक आलसजसचलो। 8 कट वन नहिपर हनत करअनिवस हनत करयो, नह9 असनहहमलहक नहो, पर एकदलमरनम3:9 उदाहरन बनगयआमरजसचलो। 10 ि जब आममरयहतबमलाँगत अदनहकरे, वन नहवन

11 आमआयकजन मरयही-चलसअननहकरत पर "आयत़ा" िबनस12 असआमिरभमसे, जन पचरहककरकआपरकर कमअनवन करे।

13 अगजरकरनिमत े।

आखरपरन

14 अदआमरिनहओकपर नजर खने, अनओकगति नहकरने। लक लजी। 15 पर ओलसमझने, पर नकओल

अखटसबद अखआसरब

16 अबिरभखन आपच मलसदअनहर परकलक े। िरभमररह

17 आपरलक नमसिखयसबच ििे; ि िलक िखसू।

18 अतिरभमसिरप3:18दया मरपर वत रह

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2 Tessalonicenses
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