जीवन को नदी
1 ऐको मंघा ओना सरगदुत ना मोला जिंदगी को पानी को नदी दीसायो, जोन स्फिटक को जसो निरमल, अना वोमा आरपार दिसत होतो, जोन परमेस्वर अना मेढ़ा को सिघासन लक हिटके, 2 यो नदी नगर को मुख रास्ता लक होतो बोहत होतो। नदी को दुही कना जीवन को झाड़ से। जिनमा बारा परकार को फर पैदा होसेत। यो झाड़ हर मास फर देसेत। यो झाड़ को पान गीन मा देस ला चँगा करन की ताकत से।
3 अता लक वहान सराप नाहती। परमेस्वर अना मेढ़ा को सिघासन ओनो नगर मा सेत। उनको दास उनको भगती करयेत। 4 वय उनको चेहेरा ला दिसेत अना उनको नाव उनको मस्तक पर लिखो होहे। 5 वहान अता लक रात होहेत नही। नाच ता उनला दियो को उजाड़ा को जरुरत होहे अना नाच सूरज को उजाड़ा, काहेका खुदच पिरभु परमेस्वर उनको उजाडो होहे। उ सदा राज करेहेती।