17 परमेस्वर कव्होसे, "का आखीर को दिवस मा असो होयेत
का मी सबा मानूसगिन पर आपरो आतमा उबड़ा देहू,
मग तुमरो टूरा अना टूरी भविस्यवानी सागेत।
अना तुमरा जवान दरसन देखेत,
अखीन तुमरा सायनो सपना देखेत।
18 हव, ओना दिवसगिन मा,
मी अपरा चाकर अना दासी गीन पर अपरी आतमा उबडाहूँ,
अना वय भविस्यवानी करेहेत।
19 मी ओरिया बादर को खाल्या धरती पर हिदान,
अना बादल मा रकत स्तो,
आना धुंगा की बादर देखाऊ।
20 पिरभू को महान अना महीमा को दिवस आवन
को पयले सूरज इंधारो अना
चांदा रक्त जसो लाली मा बदल जाहेत।
21 अना जोन कोनी पिरभु लक मद मागेत, वोला पिरभू बचाहेत।"