10 जबा दानिय्येल ला यो मालुम भयो का असो नेम मा राजा दारा को दस्तक होय गयो से, तबा उ आपरो घर गयो अना वोको वोरता को खोली को खिड़की जोन यरूसलेम नगर को कन मा उघड़त होतो। उता टोन्ड करके रोज दिवस मा तीन बार टोंगरा ला टेक कर धन्यवाद देवत होतो, वसो च आज भी करीस। 16 तबा राजा ना हुकुम दियो अना दानिय्येल ला सेर को मांद मा डाक्यो गयो। वोना बेरा राजा ना दानिय्येल लक कह्यो, "तोरो परमेस्वर जेकी तू हर हमेसा आराधना करसे, वोच तोला बचाहे।
22 मोरो परमेस्वर ना आपरो दूत धाड़यो जोनना बाघ को तोन्ड बंद कर दियो होतो अखीन उनना काही नही करयो, एको कारन यो से का मी वोको पूढा निरदोस सेऊ, अखीन ओ राजा तोरो पूढा भी मी काही गलत नही करीसेऊ।
23 यो आयक के राजा दारा बेजा खुसी भयो वोना दानियल ला बाघ को पिझरा लक बाहेर हेड़न को हुकुम दियो। तबा राजा को नवकर गीनना दानिय्येल ला बाघ को पीजड़ा लक बाहेर हेड़ीन, दानिय्येल को आँग मा एक भी खरोंच नहीं लगयो होतो। काहेका उ आपरो परमेस्वर पर बिस्वास राखत होतो।
27 ऊ संकट लक छुड़वा से,
अखीन पिरान को रक्सा कर से।
ऊ बादल मा चमत्कार को काज दिखाव से,
अखीन धरती मा चमत्कार काज कर से।
ओना सेर को टोन्ड लक दानिय्येल ला बचाइसेस।