3 असी रिती लक सेविका बुजुरुग बायकागीन को चाल-चलन मा पवीतर लोकगीन जसो होय। वय लान-छान लगावन वाली अना दरवा नही, पर साजरी गोस्टी सिकावनवारी होय। 4 ताकि वय जवान बायकागीन ला चेतात रव्हे। की आपरो नवरागीन अना लेकरागीन लक माया राखे। 5 अना धीरज धरन वारो, पवीतर, घर को काम करनवारी, साजरी अना आपरो-आपरो घरवालो को बसमा रव्हनवारी होय, ताकि परमेस्वर को गोस्टी को निन्दा न होवनो पाय।