13 फिर मैंने आसमान पर, ज़मीन पर, ज़मीन के नीचे और समुंदर की हर मख़लूक़ की आवाज़ें सुनीं। हाँ, कायनात की सब मख़लूक़ात यह गा रहे थे,
"तख़्त पर बैठनेवाले और लेले की सताइश और इज़्ज़त,
जलाल और क़ुदरत अज़ल से अबद तक रहे।"
14 चार जानदारों ने जवाब में "आमीन" कहा, और बुज़ुर्गों ने गिरकर सिजदा किया।