इलीमलिक मोआब चला जाता है
1,2 उन दिनों जब क़ाज़ी क़ौम की राहनुमाई किया करते थे तो इसराईल में काल पड़ा। यहूदाह के शहर बैत-लहम में एक इफ़राती आदमी रहता था जिसका नाम इलीमलिक था। काल की वजह से वह अपनी बीवी नओमी और अपने दो बेटों महलोन और किलियोन को लेकर मुल्के-मोआब में जा बसा।
16 लेकिन रूत ने जवाब दिया, "मुझे आपको छोड़कर वापस जाने पर मजबूर न कीजिए। जहाँ आप जाएँगी मैं जाऊँगी। जहाँ आप रहेंगी वहाँ मैं भी रहूँगी। आपकी क़ौम मेरी क़ौम और आपका ख़ुदा मेरा ख़ुदा है। 17 जहाँ आप मरेंगी वहीं मैं मरूँगी और वहीं दफ़न हो जाऊँगी। सिर्फ़ मौत ही मुझे आपसे अलग कर सकती है। अगर मेरा यह वादा पूरा न हो तो अल्लाह मुझे सख़्त सज़ा दे!"
20 नओमी ने जवाब दिया, "अब मुझे नओमी ख़ुशगवार, ख़ुशीवाली। मत कहना बल्कि मारा, कड़वी। क्योंकि क़ादिरे-मुतलक़ ने मुझे सख़्त मुसीबत में डाल दिया है। 21 यहाँ से जाते वक़्त मेरे हाथ भरे हुए थे, लेकिन अब रब मुझे ख़ाली हाथ वापस ले आया है। चुनाँचे मुझे नओमी मत कहना। रब ने ख़ुद मेरे ख़िलाफ़ गवाही दी है, क़ादिरे-मुतलक़ ने मुझे इस मुसीबत में डाला है।"