2 अर जो धरती कै नीच्चै सोए रहवैंगे उन म्ह तै भोत-से माणस मौत म्ह तै जाग उठैगें, कितणे तो सदा के जीवन कै खात्तर, अर कितणे अपणी नामधराई अर सदा ताहीं घिनोणे ठहरण कै खात्तर। 3 फेर बुद्धिमानां की चमक अकासमण्डल की जिसी होवैगी, अर जो घणखरयां नै धर्मी बणावै सैं, वे सदा तारयां की तरियां प्रकाशमान रहवैंगे।
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